हमारे प्रेरणाश्रोत - राय उमानाथ बली

एक पर-पोते द्वारा पर-बाबा की महानता का गुणगान

एक परिचय - रायउमानाथ बली के प्रपौत्र एवं राय स्वरेश्वर बली के पुत्र, सान्ध्यि बली द्वारा।

राय उमानाथ बली का जन्म 08 जुलाई 1892 को हुआ था। वह एक सांस्कृति सुधारक, राजनेता व राजनीतिज्ञ थे। उन्होने भारत के सांस्कृति संगीत, नृत्य, वादन एवं गायन के विद्यालय मैरिस काॅलेज ऑफ़ हिन्दुस्तानी म्यूजिक की स्थापना की (जिसका नाम सर विलियम मैरिस, द लेफ्टिनेन्ट गवर्नर ऑफ़ यूनाइटेड प्रोविन्सेस के नाम पर पड़ा) इसकी स्थापना उस समय हुई जब सांस्कृतिक संगीत, नृत्य एवं वादन की प्रतिभा को कम समझा जाता था एवं इसकी सीमाएं निश्चित थी, जैसे कोठे, घराने इत्यादि।

एक समय ऐसा आया जब ज्ञान एवं कला की देवी मां सरस्वती से सम्बन्धित संस्कृति, संगीत, नृत्य, वादन एवं गायन की गिनती निम्न कोटि में होने लगी, उस समय मेरे परबाबा ने इस पवित्र एवं सहमी हुई कला की पवित्रता को पुनः स्थापित करने एवं इसे समाज के सम्मुख लाने का प्रयास किया। इस प्रकार पंडित विष्णु नारायण भातखण्डे के शैक्षिक प्रयासों एवं मेरे परबाबा राय उमानाथ बली के नवीन विचारों से युक्त अथक प्रयासों के माध्यम एवं महान संगीत विशेषज्ञों की देख-रेख में भातखण्डे काॅलेज बहुत सारी भ्रान्तियों एवं कठिनाइयों के पश्चात् मैरिस काॅलेज ऑफ़ हिन्दुस्तानी म्यूजिक का नाम बदलकर भातखण्डे काॅलेज ऑफ़ हिन्दुस्तानी म्यूजिक रखा गया।

इसके पश्चात् काॅलेज ऑफ़ हिन्दुस्तानी म्यूजिक का पुनः नामकरण भातखण्डे संगीत संस्थान के नाम से हुआ एवं इस बार राज्य सरकार और यूनिवर्सिटी ग्राट्स कमीशन की संस्तुति से इसे डीम्ड यूनिवर्सिटी की मान्यता मिली।

राय उमानाथ बली द्वारा सन् 1939 में शास्त्रीय संगीत, नृत्य, वादन एवं गायन को बेहतर रूप रेखा देने के लिए व संगीत का संस्थागत रूप से प्रचार-प्रसार करने के लिए भातखण्डे संगीत विद्यापीठ नाम की संस्था बनायी गयी। मेरे पिता राय स्वरेश्वर बली इस संस्था अपने उददेश्य की और प्रतिबद्व है और आरम्भ से ही संगीत को समाज के हर वर्ग तक पहुंचाने के लिए कार्य कर रही है।

राय उमानाथ बली जी पंडित नेहरू जी, डा0 सर्वपल्ली राधाकृष्णनन, मौलाना आजाद एवं उस अन्तराल के अन्य प्रतिष्ठित दिग्गजों, जिसमे राजा-महाराजा एवं संस्कृतिक व कला के क्षेत्र से सम्बन्धित पारखियों के साथ बड़े मधुर सम्बन्ध थे। राय साहब का पूरा जीवन शिक्षा के सुधार व विकास में बीता। राय उमानाथ बली जी के सक्षम दिशा निर्देशों के अन्तर्गत उनके अनुज राय सोमनाथ बली द्वारा लाल बहादुर शास्त्री इण्टर कालेज दरियाबाद की स्थापना की गइ। इसी दौरान राय साहब ने भातखण्डे काॅलेज की स्थापना में राष्ट्रीय स्तर पर बडी तल्लीनता से कार्य किया। उन्होने दरियाबाद के लोगों के लिए भी बहुत कुछ सोचा और किया, लाल बहादुर शास्त्री इण्टर काॅलेज इसका एक उदाहरण है।

यह कहना अतिश्योक्ति नही होगा कि राय उमानाथ बली वर्तमान समय के दधिची थे। राय साहब ने अपने निजी संपत्ति तथा अपनी स्वामित्व से सम्बन्धित चीजों का भी त्याग करते हुए भारतीय शास्त्रीय संगीत की उदासीनता को दूर करने का प्रयास किया। इस प्रकार उनके यथार्थ एवं वास्तविक प्रयासों के फलस्वरूप भातखण्डे काॅलेज, जो भातखण्डे संगीत संस्थान (डीम्स यूनिवर्सिटी) के नाम से जाना जाता है। उसका गठन किया। आज यह संस्था विश्व भर मे हमारी संस्कृति और राय साहब की मेहनत का जीता जागता उदाहरण है न सिर्फ उन्होने भातखण्डे काॅलेज की स्थापना करने में अपना समय दिया बल्कि तन मन धन और ज्ञान से इसको सींचा और हमारी संस्कृति को पुरजोर करने मे अपनी आत्मा भी न्योछावर कर दी।

राय उमानाथ बली महाविद्यालय की स्थापना राय उमानाथ बली के नाम से राय उमानाथ बली इन्स्टीट्यशनल एजूकेशन सोसाइटी के द्वारा शिक्षा के प्रसार हेतु उनके प्रपौत्र राय स्वरेश्वर बली द्वारा की गयी।

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